भारत ने हमेशा लड़ी है स्वत्व की लड़ाई : विजय मनोहर तिवारीमामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी जयंती पर विशेष व्याख्यान का आयोजन, लेखक लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक ‘संघ दर्शन : अपने मन की अनुभूति’ का विमोचनभोपाल। विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश और अर्चना प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में ध्येयनिष्ठ पत्रकार-संपादक मामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी के जयंती प्रसंग पर ‘स्वतंत्रता […]Read More
माणिकचंद्र वाजपेयी जयंती पर विशेष व्याख्यान आज लेखक लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक ‘ संघ दर्शन : अपने मन की अनुभूति’ का विमोचन भोपाल। विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश एवं अर्चना प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में 7 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे प्रख्यात संपादक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी के जयंती प्रसंग पर […]Read More
संजा लोकपर्व आज भी उतना ही लोकप्रिय संजा लोकपर्व विशेष कर मालवा,गुजरात,राजस्थान,निमाड़ आदि अंचल में श्राद्ध के पंद्रह या सोलह दिनों में मनाया जाता है और उतना ही लोकप्रिय है | ये बात अलग है कुछ लोग आधुनिकता और स्वच्छता के नाम पर गोबर को हाथ नहीं लगाते लेकिन जो लोग अपनी मिट्टी से जुड़े […]Read More
More than 400 business companies on a single platform…Yessssssss Its “JBN MAHAKUMBH BY SANFIT” ” *Dear friends, You can take Complimentary Visitor Pass for 12 day full access of *Nahar JBN Mahakumbh* Starting 20th August 2021 till 31st August , a Networking opportunity to connect with 25000+ Business owners of JITO Worldwide , an open […]Read More
JBN gets ready for its ‘Mahakumbh’ With an aim to provide business opportunities and mentoring, JITO Business Network (JBN) is organising a 12-day business event, JBN Mahakumbh, for the first time. This online event will be held between August 20 to August 31. While the event is organised by Jain International Trade Organization (JITO)’s global business networking platform, […]Read More
कहानीचार धूर्त विद्वान् भाई -डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर विद्वान् और वह भी धूर्त हो तो समझलो वे अपनी चालाकी से किसी को भी ठग सकते हैं। चार सहोदर भाई कुछ पढ़े-लिखे थे। उनमें धूर्तता कूट-कूट कर भरी थी। इन चारों ने विद्वान् का लवादा ओढ़ रखा था। एक बार उन्होंने एक ब्राह्मण को […]Read More
चातुर्मास एक अनुपम उपहार : श्रमणाचार्य विमर्शसागर मुनि चक्रवर्ती भरत के भारतदेश की पवित्र भूमि पर विचरण करते परम वीतरागी दिगम्बर श्रमण-श्रमणियों, उत्कृष्ट श्रावक-श्राविकाओं, अरिहंत कथित धर्म में दृढ़ श्रद्धा रखने वाले जिनोपासक – श्रमणोपासकों एवं सद् गृहस्थों के द्वारा परम अहिंसा धर्म का शंखनाद सदा से होता आ रहा है। सभी ‘‘परस्परोग्रहो जीवानाम्’’ सूत्र […]Read More
इस वैश्विक महामारी ने हमे बहुत कुछ सिखाया है, आक्सीजन की कमी से अनेकों ने अपने प्रियजन को खोया है. यह एक बहुत बड़ा सबक है हम सब के लिए, कम से कम अब तो जागरुक और जिम्मेदार बने, “पेड़ लगाये और कटने से बचाए” अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब हम अपने आने वालीं […]Read More
स्वामी विवेकानंद: बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं – डॉ. पवन सिंह मलिक “जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं”…. मात्र 39 वर्ष, 5 मास और 23 दिन की अल्पायु में जिन्होंनें चिरसमाधि प्राप्त की। जिन्होंनें इस अत्यल्प काल में ही वर्तमान भारत की एक सुदृढ़ आधारशिला प्रतिष्ठित की। भारतीय इतिहास के इस संकटमय संक्रांतिकाल में, जिस महापुरुष ने धर्म, समाज, शिक्षा और राष्ट्र में समष्टि मुक्ति […]Read More